Ajmer Sharif dargah786

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Ajmer ki dargahकी तारीख के बारे में बात करेंगे और साथ में यह बताएंगे कि अजमेर शरीफ जो कि अपने वक्त का सबसे बड़ा मंदिर हुआ करता थाAjmer dargah वही फकीर की दरगाह कैसे बन गया हूं अजमेर शरीफ में उस वक्त एक मंदिर हुआ करता था

जो Ajmer Sharif dargah का सबसे बड़ा मंदिर था और वह मंदिर सिर्फ राजा और रानियों की इबादत के लिए खास हुआ करता था मंदिर के साथ ही एक तालाब था Ajmer dargahजिसका नाम आनासागर था हिंदू उस तालाब के पानी को इन तिहाई बरकत वाला ख्याल किया करते थे उनका किधर थाAjmer dargah कि जो इस तालाब में कर ले उसके सब गुना खत्म हो जाते हैं उस मंदिर में रात को इतनी कश्मीर तादाद में चरागों को जलाया जाया करता था

 

कि सिर्फ एक ही रात 3:30 मन तेल उन चरागों में इस्तेमाल होता थाAjmer dargah आसपास के देहात मंदिर के नाम थे ऑरेंज हाथों की आमदनी उन मंदिर पर खर्च हुआ करती थी Ajmer dargahमंदिर में हजारों नौकर थे जिनका काम आने वालों की रहनुमाई करना था Ajmer dargahऔर वह बताया करते थे कि कौन सा खुदा बेटे आता करता है कौन सा देवता सेहत और तंदुरुस्ती का मालिक हैAjmer dargah और किस मूर्ति की पूजा करने से दौलत मेहरबान होती है ख्वाजा

 

Ajmer dargah history-अजमेर दरगाह का इतिहास

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dargah history गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलेह मंदिर में तशरीफ लाए और अना सागर से कुछ फासले पर चटाई बिछाकर अपने मरीजों के साथ बैठ गए असर का वक्त थाAjmer Sharif dargah history लिहाजा आप ख्वाजा साहब ने हजरत कुतुबुद्दीन रदी अल्लाह ताला ने उसे अंजाम देने को कहा कुछ रोशनी से भरे अजमेर शरीफ में अल्लाह की बैदा नियत और हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम की रिसालत का यह पहला इलाज था

 

वहां रहने वाले लोग इस्लाम से पूरे तौर पर लाइन में थे चुनांचे जान की आवाज सुनकर वह हैरान हुए और अपने घरों से निकलकर सब मुसाफिरों को देखने लगे और Ajmer Sharif dargah अना सागर के पास भी लगा ली और मुसाफिरों ने आनासागर के पानी से वजू किया और नमाज पढ़ना शुरू कर दिया सब हिंदू हैरान रह गए वह सोच रहे थे कि सब भगवान तो मंदिर के अंदर हैAjmer dargah history यह लोग पास में खड़े होकर कौन से भगवान को सजदा कर रहे हैं शाम हुई तो राजा के और जो दिन में चढ़ने के लिए आई थी

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अपने चरवाहों के साथ-साथ वापस आने लगे इतिहास की बात ठीक हैAjmer Sharif जहां हजरत ख्वाजा साहब बैठे हुए थे वह जगह राजा के वोटों के बैठने की जगह थीAjmer dargah history चरवाहों ने बाबा साहब से कहा कि बाबा साहब यहां से उठी क्योंकि यह जगह बादशाहों के ऊंटों के बैठने की जगह है ख्वाजा साहब ने

 

 

Ajmer Sharif ki dargah-अजमेर शरीफ की दरगाह

Ajmer Sharif dargahफरमाया इतना मैदान खाली पड़ा वह तो कहीं भी बैठ जाएंगे क्यों बेवजह मुसाफिरों को तंग करते हो वह लोग नहीं माने और मुसल्ला उठाकर इधर-उधर करने लगे और ख्वाजा साहब से बदतमीजी करने लगे और उन लोगों ने आखिरकार बहुत बदतमीजी से कहा कि यह राजा के वोटों के बैठने की जगह है

 

और इधर राजा के उठ ही बैठेंगे तुम लोग कहीं और अपना मुसल्ला बिछा लेकर आप ख्वाजा साहब ने उठते हुए हजरत कुतुबुद्दीन से फरमाया उठो कुतुबुद्दीन यह कह रहे हैंAjmer Sharif dargah कि यह वोटों के बैठने की जगह है तो चल मैं कहता हूं अब यहां सिर्फ एक ही बैठेंगे यह कह कर आप ख्वाजा साहब ने अपने साथियों समेत वहां से उठ गए और अगली सुबह जब उठो को चढ़ाई के लिए ले जाने का वक्त आया और चरवाहों ने उठो को उठाना चाहा तो उन्हें पता चला कि वोट उठने के काबिल नहीं रहे हैं

 

उन्होंने को मार-मार कर जबरदस्ती उठाना चाहा लेकिन वह बैठे ही रहे चरवाहे परेशान हो गए कि जो उठ उनके एक इशारे पर उठ खड़े होते थे आज क्यों नहीं उठ रहे हैंAjmer Sharif dargah आखिरकार उन्हें याद आया कि कल मुसाफिर फकीर ने कहा था कि चलो अब यहां उठी बैठे रहेंगे लोग इकट्ठा होना शुरू हो गए कोई कह रहा था कि फकीर कोई बड़ा जादूगर है किसी का सवाल

 

था कि मैं कोई भगवान का नया अवतार हैAjmer Sharif dargah बात राजा पृथ्वीराज चौहान तक जा पहुंची एक मुसाफिर ने राजा के ऊपर जादू कर दिया है राजा ने हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को पैगाम भेजा कि तुम कैसे फकीर हो जो भी जवानों को बांध रखा है

 

यह बेचारे भूख और प्यास से मर जाएंगे इसलिए मेहरबानी करके अपना जादू वापस ले लो ख्वाजा साहब नेAjmer dargah फरमाया हम मुसलमान हैं और मुसलमान बद्दुआ नहीं करते और ना जादू करते हैं जाओ और जिसके हुकुम से बैठे थे उसी के हुकुम से एक खड़े हो जाएंगे अब जो जाकर चरवाहों नेAjmer dargah उद्योग उठाया तो पहली ही बार में उठ खड़े होAjmer ki dargah गए गैर मुस्लिमों की दिलचस्पी इन मुसाफिरों में पड़ने लगी अब पांच वक्त की अजान होती और नमाज अदा की जाती राजा तक की बात पहुंच गई और उसको शिकायत की गई कि राजा साहब जो फकीर आए हुए हैं

 

सब के सब मुसलमान हैं पांच वक्त अजान देते हैं Ajmer ki dargahऔर हमारे पवित्र तालाब को हाथ मुंह धो कर धंधा करते हैं हमारे धर्म के खिलाफ बातें भी करते हैं और कहते हैं कि मूर्तियां पूछने के काबिल नहीं यह तो महेश है पत्थर है इसलिए इन्हें यहां से उठा लिया जाए राजा पृथ्वीराज चौहान ने फकीरों को परवान भिजवाया कि तुम लोग गोश्त खाते हो हमारे

 

 

धर्म के खिलाफ बोलते हो और तो और हमारे पास तालाब को अपने हाथ मुंह धोकर नापाक करते हो जो हम कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते इसलिए तुम्हारे लिए यह बेहतर होगा होगा कि तुम यहां से चले जाओ ख्वाजा साहब ने फरमाया Ajmer Sharif dargahऔर भी तो दुनिया आती है सिर्फ हमारे ही पानी लेने से आखिरकार क्या फर्क पड़ जाएगा राजा कहने लगा वह सब हमारे धर्म और हमारे मसत के लोग हैं

 

और तुम दूसरे धर्म के हो आइंदा तुम लोगों ने तालाब को नापाक किया तो हम सख्ती से पेश आएंगे ख्वाजा साहब नहीं हजरत कुतुबुद्दीन अल्लाह ताला ने फरमाया कुतुबुद्दीन शायद यह लोग आइंदा हमारे पानी लेने पर कोई फंसा खड़ा करेंगे जाओ एकमुश्त पानी ले आओAjmer Sharif dargah हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी ने फरमाया चलिए

 

हम अपने प्याला भर लेते हैं उन लोगों ने उनको प्याला भरने से इनकार कर दिया लेकिन फिर बाद में जाकर बोलोगे शर्त पर मान गए कि तुम्हारे जैसा पानी से नाक में तो हम यह प्याला तुमको घर में देंगे ग्रीन हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन भी अल्लाह ताला हम तालाब की सीढ़ियों पर जा बैठे और अपनेAjmer Sharif dargah पहले को पानी में डुबो दिया जब वह प्याला भर गया तो हजरत ख्वाजा फखरुद्दीन रहमतुल्ला ले आना ऊपर खींच लिया लेकिन

 

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फिर क्या था जब वह प्याला पानी से बाहर आया अना सागर का सारा का सारा पानी खुश हो गया था और मैं सागर की तह में कुछ करें तो उड़ने लगी थी गोया ऐसा मालूम हो रहा थाAjmer Sharif dargah कि सारा आनासागर उस छोटे से पहले में बंद हो गया है आना सागर का कुछ कहना था

 

कि पूरे अजमेर शरीफमें कोहराम मच गया गलियों मोहल्ले में जी को बुखार और आंखों की आवाज में शुरू हो गई वह लोग रो रहे थे और यह कह रहे थे कि जो गुनाहों की घटिया हम लाते थेAjmer dargah और अना सागर में नहा कर उन गुनाहों से छुटकारा पा लिया करते थेAjmer dargah अब हम क्या करेंगे अब हम गुनाहों का बोझ कहां लिए फिरेंगे सारे इलाके में यह खबर फैल गई कि मुसाफिर फकीर ने जादू के जोर से आना सागर को खुश कर दिया है

 

मोहतरम नाजरीन जानती है आगे क्या हुआ आगे हुआ यह कि राजा पृथ्वीराज चौहान एक नई मौजूदा सूरते हाल से बहुत परेशान हुआ उसने अपने व जीरो को बुलाया सब से यही कहा कि फकीर या तो जादूगर हैAjmer dargah या फिर वाकई कोई काम मिल सकी है

 

साथ ही उनकी परेशानी बढ़ गई कि अजमेर शरीफ की रौनक तो आना सागर के दम से थी इसकी वजह से लोग दूर-दूर से अजमेर शरीफ आते थेAjmer dargah और अपना ईमान ताजा करके लौट जाया करती थी आनासागर के कुछ खो जाने से हिंदू धर्म को सख्त

 

धक्का लगेगा और यह बड़ी शर्मनाक बात थी आखिरकार यह कहा गया कि फकीर से बात की जाए क्या फिर फकीर चाहता क्या है अगर कोई ऐसी बात चाहता हैAjmer dargah जो हमको तस्लीम हो तो फिर हम उसकी बात को मान लेते हैं और उससे माफी मांग लेते हैं

 

चुनांचे सब मर्द औरतें और बच्चे जाकर फकीर की मन्नत करने लगे कि लोगों को परेशानी से निजात दिलाएं और हम सब पर मेहरबानी करो हम सब की जो गलती हुई हैAjmer hotel near dargah उसे माफ कर दो पर हम अपने गुनाहों का बोझ उठाए किधर किधर जाएंगे और कैसे सुकून पाएंगे क्योंकि हम लोग उसी नदी में अपने गुनाहों का भोजपुरिया करते थे यह तहसील ज्यादा आसान थी

 

लिहाजा तमाम लोग बाबा साहब ने मंत्रालय के पास आए और बोले बाबा तुम भी बुजु कर लिया करना लेकिन भगवान के वास्ते हमारा आनासागर हमें लौटा दो हजरत ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्ला ले कुतुबुद्दीन ख्वाजा बख्तियार काकी से फरमाया कि जाओ उसी को वापस तालाब में डाला हो

 

जैसे ही वह प्याला तालाब में डाला गया आनासागर के नीचे सारा पानी उछल उछल कर आना सागर में आ गया इस पानी ने कई दिलों को धो डाला हिंदू कौम की अपनी तारीफ की किताबों में भी हिंदू मोरसीम इस बात को तस्लीम करते हैं कि उस शाम 32000 गैर मुस्लिमो Ajmer dargah

 

ने कलमा पढ़कर इस्लाम में अपनी दस्तक दी यानी 32000 लोग उस दिन मुसलमान हुए उन गैर मुस्लिमों के मुसलमान हो जाने से हिंदू पंडितों और आम हिंदुओं पर भी उसे का तूफान खड़ा हो गयाAjmer dargah और वह सोच में पड़ गए कि फकीर अगर कुछ दिन और रहा तो देवी देवताओं का नाम लेने वाला कोई नहीं रहेगा यहां से लोगों ने राजा को मजबूर किया कि जल्द कुछ किया जाए

 

राजा ने मंदिर के बड़े पंडित रामदेव को बुलाया और उसे बाबा साहब से मुनाजरा रखकर जल्द से जल्द अपनी शक्ल देने और अजमेर शरीफ से बाहर निकाल देने का हुक्म देAjmer dargah दिया रामदेव अधिवक्ता माना हुआ पंडित था इसलिए इनकी काबिलियत की दूर-दूर तक धूम मची हुई थी दरअसल पंडित शैतानी और जादुई ताकतों का मालिक था

 

उसने राजा पृथ्वी को यकीन दिलाया कि जल्द ही राजा कोई अच्छी खबर सुनेगा रामदेव बाबा ख्वाजा साहब रहमतुल्ला ले के पास आया और उल्टे सीधे सवाल आप करना शुरू कर Ajmer dargahदिएअजमेर शरीफ के हजरत ख्वाजा फरमाया खामोशी जरूरी है इसीलिए हजरत ख्वाजा रहमतुल्ला ले खामोशी अख्तियार कि जब रामदेव ने हद से बढ़ कर शोर मचाना शुरू कर दिया तो हजरत ख्वाजा गरीब नवाज नहीं हैAjmer Sharif dargah उसकी तरफ आंख उठाए और मुस्कुराकर सरमाया रामदेव शोर मचा रहा है और मैं तेरे

 

 

माथे पर ईमान कन्नूर चमकता हुआ देख रहा हूं बस इतना कहना थाAjmer Sharif dargah न जाने क्या करिश्मा हुआ देखते ही देखते बाबा रामदेव के कदमों पर गिरा और रोते हुए बोला बाबा साहेब जिस धर्म के तुम हो उस घर में मुझे शामिल कर Ajmer dargahलो सब लोग जो मुनाजरा देखने आए थे

 

सब हैरान हुए और बाबा रामदेव जो बाप को शिकस्त देने आया था खुद ही मुसलमान हो गया तारीख की किताबें भरी पड़ी है हजरत ख्वाजा गरीब नवाज गोवा ही बुजुर्ग हैं जिन्होंने 9000000 गैर मुस्लिमों को मुसलमान किया सदियां बीत गई लेकिन आज भी ख्वाजा गरीब नवाज का डंका वैसे ही बज रहा है

 

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