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 Geeta shlok kya hai ? Bhagawat Geeta shlok in hindi 2021

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क्या आप भगवत गीता के बारे में जानना चाहते हैं तो Geeta shlok kya hai, गीता श्लोक क्यों कहे गए, geeta shlok किसके द्वारा कितने कहे गए, गीता का नाम गीता ही क्यों पड़ा और गीता श्लोक का सारांश क्या है ? यह सारी बातें हम इस आर्टिकल geeta shlokपर समझते हैं |

हमने यहां पर गीता के मुख्य श्लोक के साथ-साथ उनका हिंदी अनुवाद भी बताया हुआ है जो आप अच्छे से समझ सकते हैं Geeta shlok kya hai चलिए विस्तार से समझते हैं |

Geeta shlok kya hai

गीता श्लोक के द्वारा भगवान श्री कृष्ण नेgeeta shlok संपूर्ण महाभारत के बारे में बताया है इसमें सबसे ज्यादा geeta shlok पांडव पुत्र अर्जुन और श्री कृष्ण के बीच कहे गए हैं |

क्या आप गीता श्लोक के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं यदि हां ! तो उसके लिए इसी आर्टिकल में नीचे बताया गया है जिसमें आप संस्कृत के साथ-साथ हिंदी और इंग्लिश में भी समझ सकते हैं |

Geeta shlok क्यों कहे गए ?

जब पांडव पुत्र अर्जुन अपने भाई कौरवों के साथ युद्ध करने के लिए धनुष नहीं उठा पा रहा था उसको लगता था इनसे जीतने में भी मेरी हार है, geeta shlokऔर हारने में भी मेरी हार है |

तब श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को यह गीता श्लोक कहे गए श्री कृष्ण और अर्जुन की वार्तालाप के बीच कृष्ण के द्वारा 574 और अर्जुन के द्वारा 84

geeta shlok कहे गए |

गीता का पहला श्लोक क्या है ?

श्रीमद्भागवत गीता का पहला श्लोक राजा धृतराष्ट्र औरgeeta shlok संजय के बीच वार्तालाप में महाराज धृतराष्ट्र जो कि नेत्रहीन थे उन्होंने कहां |

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्र समवेता युयुत्सव:|

मामका: पांडवाश्चैव किमकुर्वत संजय ||

हिन्दी अर्थ – महाराज धृतराष्ट्र संजय से बोले “हे संजय” ! धर्म क्षेत्र में इकट्ठे हुए, युद्ध की इच्छा करने वाले मेरे और पांडू पुत्र क्या कर रहे हैं |

महाराज धृतराष्ट्र नेत्रहीन थे और वह युद्ध का पूरा हाल-चाल जानना चाहते थे इसलिए श्री कृष्ण ने संजय को दिव्य दृष्टि दी थी, जिससे वह बिनाgeeta shlok युद्ध में उपस्थित हुए पूरा युद्ध देख सकते थे इसलिए राजा धृतराष्ट्र ने संजय से यह सवाल किया था पहले इस लोक के रूप में तो यह गीता का पहला श्लोक है |

गीता का सबसे विशेष श्लोक कौन सा है?

कहा जाता है गीता श्लोक मीठे लड्डू के समान है जिसको चाहे जहां खाया जाए वह मीठा ही लगता है मेरे अनुसार गीता का सबसे विशेष श्लोक हैं –

यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर: |

तत्र श्रीविर्जियो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ||

हिन्दी अर्थ – संजय हे राजन् ! जहां भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहां गांडीव धनुष धारी अर्जुन है वहीं श्री विजय, विभूति और अचल नीति है |

गीता श्लोक संख्या (गीता में कितने अध्याय व श्लोक है)

संपूर्ण भगवत गीता में कुल 18 अध्याय हैं और 700 श्लोक हैं जिसमें से 574 श्री कृष्ण द्वारा, 84 अर्जुन द्वारा और 41 संजय के द्वारा कहे गए हैं |

गीता का नाम गीता ही क्यों पड़ा ?

गीता का हिंदी अर्थ गीत है और भगवत काgeeta shlok अर्थ महाभारत में भगवान बताया गया क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण का गीत है जो कि उनके द्वारा कहा गया है इसीलिए इसको नाम भगवत गीता दिया गया है |

Geeta shlok kya hai (हिन्दी अनुवाद)

गीता का यह श्लोक आपने बहुत सी movie और serial में सुना होगा और वह इसलिए क्योंकि यह गीता का सबसे फेमस श्लोक है –

 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिभज़्वति भारत: |

अभ्युत्थानमधमज़्स्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ||

(अध्याय 4, श्लोक नं 7)

हिन्दी अर्थ – हे भारत (अर्जुन), जब-जब धर्म का नाश यानी धर्मgeeta shlok का लोप होता है और अधर्म में वृद्धि होती है, तब तब मैं (श्री कृष्ण) धर्म अभ्युत्थान के लिए स्वयं की रचना करता हूं यानी अवतार लेता हूं |

English meaning – Arjun, whenever there is annihilation of dharma and increase in unrighteousness, then I (Shri Krishna) create self incarnation for the upliftment of dharma.

परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम् |

धमज़्संस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे ||

(अध्याय 4, श्लोक नं 8)

इस गीता श्लोक का हिंदी अनुवाद है –

सज्जन पुरुषों के कल्याण के लिए, दुष्कर्मियों के विनाश केgeeta shlok लिए और धर्म की स्थापना के लिए मैं (श्री कृष्ण) युगो युगो से जन्म लेता आया हूं |

 

सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः|

पार्थो वत्ससुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं महद् ||

हिन्दी अर्थ – उपनिषद गाय समान है जिनका दूध श्री कृष्ण खुद निकालते हैं, और अर्जुन उस गाय के बच्चे समान है जो उस दूध को पीता है और दूध साक्षात् भगवत गीता का ज्ञान है |

 

प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् |

आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते ||

हिन्दी अर्थ – हे अर्जुन, जब एक व्यक्ति सभी प्रकार की कामनाओgeeta shlok और इंद्रियों का त्याग करता है तब उसे आत्म संतुष्टि मिलती है, और वह स्थितप्रज्ञ कहलाता है अर्थात पारदर्शी रूप से स्थित |

 

दु:खेष्वनुद्विग्नमना: सुखेषु विगतस्पृह:।

वीतरागभयक्रोध: स्थितधीर्मुनिरुच्यते।।

हिन्दी अर्थ – जिस व्यक्ति के लिए सुख और दुख एक समान हैgeeta shlok जो भय और क्रोध से मुक्त है ऐसा बुद्धि वाला माना मुनी कहलाता है |

 

नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: |

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ||

(अध्याय 2 श्लोक नं 23)

इस गीता श्लोक के जरिए श्री कृष्ण ने बताया है geeta shlokकि आत्मा को ना तो शस्त्र काट सकता है, ना आग जला सकती है, ना पानी बिगा सकता है, ना हवा सुखा सकती है | (श्री कृष्ण के शब्दों का मतलब है की आत्मा पूरी तरह से अजर अमर है)

 

हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम् |

तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय: ||

(अध्याय 2 श्लोक नं 37)

हिन्दी अनुवाद – हे अर्जुन यदि तुम युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते होgeeta shlok तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी होते हो तो धरती पर सुख को भोगोगे इसलिए उठो, हे कुन्ती पुत्र (अर्जुन), यह निश्चय करके युद्ध करो। (यहां भगवान श्रीकृष्ण ने वर्तमान कर्म के परिणाम की चर्चा की है, तात्पर्य यह कि वर्तमान कर्म से सर्वश्रेष्ठ और कुछ नहीं है।)

 

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते |

सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ||

(अध्याय 2 श्लोक नं 62)

इस श्लोक का हिन्दी अनुवाद है – विषयों (वस्तुओं) के बारे में सोचते रहने से किसी भी मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे मानव में कामना यानी इच्छा geeta shlokपैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है। (यहां भगवान श्रीकृष्ण ने विषय आसक्ति के दुष्परिणाम के बारे में बताया है।)

 

क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम: |

स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ||

(अध्याय 2 श्लोक नं 63)

इस श्लोक का हिन्दी अर्थ – क्रोध के कारण मनुष्य की मति मारी जाती है यानी मूढ़ हो जाती है जिससे स्मृति भ्रमित हो जाती है। स्मृति-भ्रम हो जाने से मानव की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मानव स्वयं अपना ही का नाश कर बैठता है।

 

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ||

(अध्याय 3 श्लोक नं 21)

हिन्दी अर्थ – महान पुरूष जो जो आचरण यानी जो-जो काम करते हैं, दूसरे मनुष्य (आम इंसान) भी वैसा ही आचरण, वैसा ही काम करते हैं। वह (श्रेष्ठ पुरुष) जो प्रमाण या उदाहरण प्रस्तुत करता है, समस्त मानव-समुदाय उसी का अनुसरण करने लग जाते हैं।

 

श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: |

ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ||

(अध्याय 4 श्लोक नं 39)

हिन्दी अर्थ – श्रद्धा में विश्वास रखने वाले मानव, अपनी इन्द्रियों पर संयम रखने वाले मानव, साधनपारायण हो अपनी तत्परता से ज्ञान प्राप्त करते हैं, फिर ज्ञान मिल जाने पर जल्द ही परम-शान्ति (भगवत्प्राप्तिरूप परम शान्ति) को प्राप्त होते हैं।

Geeta shlok का सारंश क्या है ?

अगर आप और अधिक समझना चाहते हैं कि गीता क्या है Geeta shlok kya hai और इसका सारांश क्या निकल कर आता है, 

तो आज से ही गीता श्लोक पढ़ना शुरू कर दीजिए और साथ ही इसके बारे में सुनना शुरू कर दीजिए अगर आप बुक नहीं खरीद सकते हैं तो youtube पर ऐसे बहुत से channel हैं जहां पर अष्टावक्र गीता के बारे में बताया गया है |

वैसे अगर शार्ट में इसके सारांश को कहा जाए तो वह यह है कि गीता हमको जिंदगी के सही मायने बताती है और मृत्यु के भय से छुटकारा दिलाती है |

Conclusion

अगर आप खोज रहे थे कि geeta shlok kya hai गीता श्लोक के बारे में जानकारी, तो ये हमारी तरफ से गीता श्लोक के बारे में कुछ जानकारी है आशा करते हैं आपको पसंद आई होगी |