मकर संक्रांति क्या होता है ? मकर सक्रांति क्यों मनाया जाता है ?

makar sankranti kya hota hai

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको बताते हैं कि मकर संक्रांति क्यों खास हैं और इस दिन क्या अच्छा करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये। क्यों हिन्दू धर्म के रितीरिवाज के अनुसार मकर संक्रांति के बाद सभी शुभ कार्य शुभारंभ कर दिया जाता हैं जैसे – शादी-विवाह का कार्य, गृह प्रवेश, भूमिपूजन, दुकान या ऑफिस आदि।

1 – मकर संक्रांति क्या होता हैं ?

हम आपको यह जानकारी बता रहे है कि आज के दिन ही भगवान भास्कर अर्थात सूर्य भगवान मकर राशि में प्रवेश कर जाते है जो हिन्दू धर्म ग्रन्थ के अनुसार बहुत शुभ समय शुरू हो जाता हैं। इसे ही मकर संक्रांति कहते हैं।  

2 – 14 जनवरी या 15 जनवरी को ही मकर सक्रांति पर्व क्यों मनाया जाता हैं ?

हम आपको बताना चाहते हैं कि सूर्य प्रत्येक महिना राशि परिवर्तन करता रहता हैं। इक राशि की गणना 30 अंश का होता है, सूर्य की अंश की लम्बाई 24 घंटा में पूरा करता है। इसी करना जिस तारीख को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उसी तारीख को मकर संक्रांति मनाया जाता हैं। और हिंदी कैलेंडर के अनुसार 365 दिन 6 घंटे लगता हैं एक चक्कर लगाने में यही 6 घंटे जोड़कर 4 वर्ष में लिप ईयर वर्ष कहलाता है यही कारण मकर संक्रांति कभी 14 जनवरी या 15 जनवरी को ही मकर सक्रांति मनाया जाता हैं।

तथा इतिहास से यह पता चला है की पहले 12 जनवरी या 13 जनवरी को ही मकर सक्रांति मनाया जाता था। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भविष्य में 16 जनवरी या 17 जनवरी को भी मकर सक्रांति मनाया जा सकता हैं। और हिन्दू पंचांग के अनुसार सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उसी मकर संक्रांति के दिन से ही दिन बड़ा और रात छोटा होने लगता हैं, और जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करती है तो रात बड़ी और दिन छोटी होने लगता है।

3 – मकर संक्रांति की पौराणिक कथा क्या सिखाती हैं ?

१- यह जो पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि भगवान के पास जाते हैं तो उस समय भगवान शनि मकर राशि का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जो पिता और पुत्र के बीच स्वस्थ संबंधों को मनाने के लिए मकर संक्रांति को महत्व दिया गया इससे यह स्पष्ट होता है कि जब पिता अपने पुत्र से ख़ुशी पूर्वक मिलता  है तो हर संघर्ष का निवारण हो जाता है, जो सकारात्मक सोच और और समृद्धि को मजबूत कर देता है, 

२- अगला पौराणिक कथाएं के अनुसार मकर संक्रांति के पीछे एक और पौराणिक कथा छुपी हुई है जो महाभारत काल मैं भीष्म पितामह जिन्हें गंगापुत्र कहा जाता है यह शांतनु के भीम पुत्र थे इन्हें वरदान था कि आप अपनी इच्छा से मृत्यु प्राप्त कर सकते है, मकर सक्रांति भीष्म पितामह के जीवन से ही जुड़ी है, जब महाभारत काल में पांडव और कौरव के बीच में कुरुक्षेत्र में युद्ध हो रहे थे तब अर्जुन ने भीष्म पितामह पर तीर चलाए तो वह बाण भीष्म पितामह को लगती है, और बाणो की सैया पर लेट जाते हैं, तब उन्हें यूद्ध का अंत देखना था और पांडवों के विजय के उपरान्त उन्होंने मकर संक्रांति के दिन ही अपना शरीर को त्याग किये थे, इसी कारण मकर संक्रांति के पीछे भीष्म पितामह की कथा छुपी  हुई है।

३- मकर संक्रांति के दिन विष्णु भगवान जी ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर के असुरों के सिर को  काटकर मंदार पर्वत पर फेंक दिए थे, जिससे भगवान विष्णु के जीत पर मकर सक्रांति मनाया गया।

4 – मकर संक्रांति की पूजा विधि

जो लोग मकर संक्रांति त्योहार को विशेष दर्जा देते हैं वह लोग अपने-अपने घरों में विधि पूर्वक पूजा करते हैं जिसकी विवरण में निम्नलिखित प्रकार के है। भगवान सूर्य की पूजा के लिए सबसे पहले पंडित जी से पूज्य काल मुहूर्त और महाकाल में मुहूर्त निकाले जाते हैं पूजा के लिए एक स्थान बना ले उस स्थान को साफ कर लें या शुद्ध कर लें इसके बाद यह पूजा सूर्य भगवान को समर्पित करें।

इसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करने के लिए एक शुद्ध खाली में अगली सामग्री जैसे चावल का आटा हल्दी का मिश्रण सुपारी पान के पत्ते शुद्ध जल फूल अगरबत्ती रख ले। इसके बाद एक थाली में काली और सफेद तिल के लड्डू रख ले।इसके बाद सूर्य भगवान के प्रसाद के लिए काला तिल और सफेद तिल कुछ पैसे मिठाई चढ़ा ले। पूजा करते समय सभी लोग महिला या पुरुष अपने अपने माथे को ढक ले। इसके बाद सूर्य भगवान की आरती कर ले फिर सूर्य मंत्र ओमकार औसत सूर्यास्त नमः का जाप 21 या 108 बार किया जाता है।

5 – मकर सक्रांति से होने वाला लाभ

इस अवधि के दौरान यानी 14 जनवरी या 15 जनवरी के दिन सभी कामों में सफल परिणाम प्राप्त होती है। मैं समाज में धर्म और आध्यात्मिक धर्म का प्रचार करने में अच्छा समय माना जाता है। आध्यात्मिक भावना से सकारात्मक सोच और शरीर को स्वस्थ रखती है।

6 – मकर संक्रांति को मनाने का तरीका

मकर संक्रांति मनाने के लिए सबसे पहले कुछ लोग गुरु व तिल लगाकर नदी में स्नान करते हैं इसके बाद सूर्य भगवान को जल अर्पित करके पूजा करते हैं पूजा के दौरान लोग दान पुण्य का भी विशेष महत्व देते हैं दान पुण्य में गुड़ तिल फल आदि का दान किया जाता है, इसके बाद दही चुरा मीठा तिल से बने सामग्री का सेवन किया जाता है, मकर संक्रांति के दिन सूर्य भगवान को खिचड़ी का भी भोग लगाते हैं, उसकी छवि को विशेष महत्व दिया जाता है उलगाते हैं उस स्त्री को विशेष महत्व दिया जाता है एक भिन्न प्रकार का खानपान का सेवन करके हम लोग खुशी पूर्वक पतंग उड़ाते हैं या त्यौहार एक अच्छी सोच सकारात्मक खुशी एवं शरीर को स्वस्थ रखने में विशेष महत्व दिया गया है।

7 – भारत में मकर संक्रांति और संस्कृति

भारत में मकर संक्रांति का त्योहार हर राज्य में बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन हर राज्य में हर प्रांत में लोग अलग-अलग तरीके अलग-अलग नाम और परंपरागत से मनाते हैं।

  • बिहार के कुछ हिस्सों में इसे मकर संक्रांति कहते हैं तो कुछ हिस्सों में इसे खिचड़ी का पर्व मानते हैं बिहार में यह त्यौहार बड़ी उमंग के साथ लोग मनाते हैं इस दिन उड़द का दाल और चावल पूरा गांव सोनी पल गांव करने का भी मन या तत्व है।
  • उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में भी इसे खिचड़ी का पर्व मानते हैं इस दिन यहां के लोग इस दिन नदी मैं डुबकी लगाकर स्नान करना शुभ मानते हैं उस दिन इलाहाबाद में 1 महीने मामा जी मेला शुरू होता है।
  • पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में हर साल मकर संक्रांति के दिन एक बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है जिसका नाम है गंगासागर।गंगासागर का नाम गंगासागर इसलिए पड़ा क्योंकि राजा भागीरथ के 7000 गंगा नदी में नीचे के क्षेत्र में डुबकी लगाए थे इस मेले में देश की बड़ी से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री भाग लेते हैं।
  • उड़ीसा में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है उड़ीसा में कुछ रहने वाले आदिवासियों मकर संक्रांति से भी जानते हैं नए साल की शुरुआत इसी दिन से लोग करते हैं सभी एक साथ भोजन कर और मिलकर नाच गाने गाते हैं।
  • तमिलनाडु में मकर सक्रांति को पोंगल कहा जाता है पुण्य का कार्य होता है खिचड़ी।
  • आंध्र प्रदेश आंध्र प्रदेश में मकर सक्रांति को शक माया के नाम से जाना जाता है।
  • तेलुगु तेलुगु में इसे पेड़ा पादुका कहते हैं जिसका अर्थ होता है बड़ा उत्सव।
  • गुजरात एवं राजस्थान गुजरात एवं राजस्थान में मकर सक्रांति को उत्तरायण के नाम से मनाया जाता है इस दिन पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता रखी जाती है गुजरात में मकर सक्रांति के दौरान 2 दिन का राष्ट्रीय अवकाश भी होता है वह लोग इस त्यौहार को बहुत बड़ा   मानते हैं।
  • मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में इसे सकरात कहां जाता है।
  • हरियाणा हरियाणा में मटकी कहां जाता है और हिमाचल प्रदेश में विश्व मटकी के नाम से ही जाना जाता है।
  • पंजाब पंजाब में इसे लोहारी के नाम से जानते हैं इसी दिन से किसान फसल काटते हैं।
  • कश्मीर मैं इस से ससुर श्रीकांत के नाम से जानते हैं।
  • केरल केरल में एक विशेष महत्वपूर्ण त्यौहार मानते हैं जो कि 40 दिनों का अनुष्ठान करते हैं ए तो भारत देश के अलग-अलग राज्यों मैं मनाने वाले पर्व अब आइए विदेश में भी मकर सक्रांति को महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में माने जाते हैं।

8 – विदेशों में मकर संक्रांति के त्योहार को मनाये गए देशों का नाम

विदेश में मकर संक्रांति को अनेक प्रकार के नामों से जाने जाते हैं जो इस प्रकार है।

  • नेपाल – नेपाल में इसे माधव संक्रांति कहते हैं।
  • थाईलैंड – थाईलैंड में शौकीन करते हैं।
  • म्यानमार – म्यानमार में इसे भिन्न अज्ञान कहते हैं।
  • कंबोडिया – कंबोडिया में इससे मोहा सनग्रीन कहते हैं।
  • लाओस – लाओसा में इसे फीफा लाओ के नाम से जाना जाता है।

9 – क्या दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है

उस दिन यानी मकर सक्रांति के दिन जो लोग गरीब असहाय लोगों को गर्म वस्त्र का दान करते हैं उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है इस दिन जो लोग लाल और पीले कपड़े का वस्त्र धारण करते हैं उन्हें भाग्य में समृद्धि प्राप्त होती है फुल को अध्य करने के सम्मान में वृद्धि शरीर में सकारात्मक ऊर्जा शक्ति का विकास होता है आध्यात्मिक शक्तियों का भी विकास होती है।

10 – 2022 में मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

नमस्कार दोस्तों आइए हम अब 2022 में मकर सक्रांति का शुभ मुहूर्त है इसके बारे में आप लोगों के बीच बताने वाले हैं वर्ष 2022 में 14 जनवरी शुक्रवार को मकर सक्रांति है इस दिन 5 माह के सूट पक्ष की द्वादशी तिथि है 14 जनवरी 2022 को सूर्य देव मकर राशि दोपहर 2:00 बज के 29 मिनट में होना है मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में लगभग 1 माह के लिए जाते हैं इस बार मकर संक्रांति रोहिणी नक्षत्र में हो रही है जो शाम के 8:18 तक रहेगा इस नक्षत्र को शुभ नक्षत्र माना जाएगा।

तो दोस्तों मकर सक्रांति के बारे में ये आर्टिकल आपको कैसा लगा हमे कमेंट कर के जरुरु बताइये।