happy navratri wishes 2021

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happy navratri wishes 2021-नवरात्रि की शुभकामनाएं 2021

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navratri हिन्दू का मुख्य त्योहार में से एक हैhappy navratri wishes 2021 नवरात्रि इस में पुरे नो रात दश दिन बड़ी दुम दाम से मनाते है इस नवरात्रि में नो देवी की पूजा की जाती है एक नवरात्री ही एक है जो की हर अलग अलग तरा से मानते है और अगर हम गुजरात की बात करे तो गुजरात के जैसे तो शयद ही कही मानते होंगे navratri जब जब नाम अता है तो वहा गुजरात का नाम अता हैhappy navratri wishes 2021 गुजरात डांडिया या गरबा के नाम से जना जता है गुजरात में ये नो दिन में सब दिल खोल कर पूरी रात गरबा खेलते है गुजरात में माता की करती भी अनोखी तरा से होती है

पश्चिम बंगाल

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पश्चिम बंगाल की बात करें तो इस नवरात्रि पश्चिम बंगाल मेंhappy navratri wishes 2021 सब से ज्यादा और दुम दाम से त्यौहारो मानते है तो वो है दुर्गा पूजा ये बगल के लिए बहोत खाश दिन होता है दुर्गा पूजा पुरे देश में ही नहीं बल्कि ये पुरे विश्व में पार्शद है इस दिन बगल के लोग खाश वत्र फेंटें पहनते हैhappy navratri wishes 2021 और बहोत दुम दाम से माँ दुर्गा की पूजा करते है

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नौ देवी के नाम

शैलपुत्री -देवी दुर्गा के नौ रूप है देवी में नौ में सब से प्रथम नाम इस का अता हैhappy navratri wishes 2021 ये पहाड़ो में विराज मान है
ब्रह्मचारिणी -दूसरे दिन माँ अर्चना की पूजा की जाती है इन के हाथ में जप की माला और एक हाथ में कमलडल रहाता है
चंद्रघंटा -माँ दुर्गा का तीसरा नाम है चंद्रघंटा चाँद की तरा चमक ने वाली
कूष्माण्डा -इस का मतलब है की पूरा विश्व उन के चरणों में है
स्कंदमाता -इस की पूजा पाचवे दिन की जाती है कार्तिक माता कहते है
कात्यायनी -इस की पूजा छटे दिन करी जाती है
कालरात्रि -माँ दुर्गा की सातवीं सकती इस को बुरी सकती का नाश करने वाली
महागौरी -इस को माँ गोरी के नाम से जाना जता है
सिद्धिदात्री – इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

माँ देवी के मुख्य स्थान

1 . कटरा में मां वैष्णो देवी का
2 . चामुंडा देवी हिमाचल में
3 . माँ वज्रेश्वरी कांगड़ा वाली
4 . हिमाचल में माँ ज्वालामुखी देवी
5 . माँ चिंतापुरनी उना
6 . बीसलपुर में माँ नयना देवी
7 . पंचकूला में माँ मनसा
8 . बंगाल में कालका माँ कलिका
9 . सनपुर माँ शाकम्भरी देवी
यहाँ पर लोग मन तन से इन माँ के दर्शन के लिए बहोत दूर दूर से आते है माँ दुर्गा का नौ रूप है जो भारत में अलग अलग जगा पर विराज मान है ज्यादा तर लोग दर्शन के लिए नवरात्रि जाते है

navratri 2021

navratri 2021 में नवरात्रि 7 अक्टूबर को है पिछले दो सालो से कोरोना की वजे से नवरात्री उस तरा से नहीं मनापा रहे है जैसे की हम मानते है ये साल भी गरबा नहीं खेल पयेगे नवरात्री नहीं मनापा रहे है इस बात का तो अब्सोस तो पुरे भारत में है पर सब से ज्यादा दुःख है तो वो गुजरात में हैhappy navratri wishes 2021 कोरोना की वजे से हम नहीं मना रहे है

navratri aarti

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हिन्दू धर्म में माँ को अनेक नामों से पुकारते है माँ पहाड़ो वाली माँ वैष्णो देवी वाली माता शेरोवाली माता और भी नामो से माता के भक्त माँ को बोलते है पुरे विश्व में माता के अनगिनत मंदिर है पुराणों माँ अम्बे के अनेक रूप हैhappy navratri wishes 2021 माँ अपने भक्तो की सभी मनो कामना पूरी करती है navratri aarti के बाद आप आरती को मन में गाते है तो माँ प्रसन होती है माता की आरती करने से आप की एक तो आपकी पूजा पूरी हो जाती और माँ आप से प्रसन होती है navratri में आप अगर aarti के सात आप व्रत भी करते है तो बुरी सकती का नाश होता है और बुरी सकती आप से दूर रहती है

durga pooja-दुर्गा पूजा

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प्राचीन काल में एक राजा था उस का नाम सूरत था उन के भोले पन को देख कर दुश्मन ने हमला कर दिया उस का नतीजा ये निकला की उन हीhappy navratri wishes 2021 की सेना ने उन को धोखा देखर दुश्मन के सात हो गए इस लिए उन की हर हो गयी और उस के बाद वो निराश हो कर जंगल में तपस्वी में निवास करने लगे

उस ही जंगल में समाधि नामक वणिक मिला जो की अपने पत्नी और बच्चो के कारण जंगल में चले गए तदन्तर ये महर्षि आश्रम आये उनोने आश्रम आने का कारण पूछा तो उनोने अपनी बात बताई

महर्षि ने बोला की मन शक्ति के अधीन होता है भगवती और शक्ति के दो रूप है विद्या और अविद्या. प्रथम और ज्ञान और अज्ञान उन के
एक बार राजा सूरत ने एक बार पूछा की देवी कोन है और उन का जन्म केसा और कहा हुवा

ऋषि बोले है राजा जिस देवी के बारे में आप पूछ रहे हो विश्वव्यापिनी हैं

पुराने समय में जब भगवान विष्णु जी समुन्द्र के अन्दर शैय्या पर शयन कर
तब उन दोनों से कर्ण कुहरों मधु और कैटभ वहा पैदा हुआ

जमीन पर कदम रखते ही जमीन पर कमल उत्पन्न हुए जमीं पर पैर रखते ही विष्णु जी की नाभि से कमल से उत्पन्न होने वाले ब्रह्मा को मरने लगे

तब ब्रह्मा जी ने सोचा की मेको बचने वला और कोई नहीं भगवान विष्णु के शिवा मेरा कोई भी सात देने वला कोई और नहीं पर उस समय वो आराम कर रहे थे

भगवान विष्णु जी की जग उठे योगनिद्रा तब भगवान विष्णु और राक्षसों के बिच बहोत लम्बे समय तक युद चला काम से काम पांच हजार वर्षों तक लास्ट में भगवान विष्णु के हाथों दोनों मने गए

ऋषि बोले आप अब ब्रह्मा जी के बारे में सुनो एक बार की बात है की देव लोग के राजा और इंद्र और दैत्यों स्वामी महिषासुर काफी समय तक बहुत जोर दार संग्राम हुआ

और इस लड़ाई में देवराज को हर का समना करना पड़ा और महिमासुर इन्द्र लोग पर राज काने लगे उस समय ब्रह्मा जी जोकि युद्ध में पराजित हुवे थे भगवान विष्णु जी और शवि जी के पास गए और उन से मदत के लिए बोले

इस हार की बात सुनकर भगवान शंकर जी को और भगवान विष्णु जी बहुत गुसा आया गुस्से में भगवान शंकर भगवान विष्णु और ब्रह्मा,एक रोशनी निकली और वी देखते ही देखते तेज देवी के रूप में बदल गयी

गुस्से महिषासुर सिंहनाद की और भगा उस ने देखा की देवी के अंदर तीनो रूप उन में मौजूद है महिषासुर ने अपना पूरी शक्ति और दम लगा दिया और वो छल से भी नहीं जित पाया और अंत में वो देवी के हात से मारा गया

तीन साल बाद माँ दुर्गा ने प्रकट होकर उन दोनों को अपना आशिर्वाद दिया