radha krishna-राधा-कृष्ण

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महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद  वायु  देवता को भगवान श्री कृष्णा के पास भेजा  वायु दूत ने भगवन श्री कृष्णा से बोले की आप को पृत्वी पर भेजा है की पृथ्वी हो रहे अतिया चार रोक ने के लिये आप ने अवतार लिया था आप का कार्य समाप्त हो गया हे तो सोमनाथ मंदिर के पास समुंद्र के पास आय और वह आपसी विवाद होगया  और वो सब एक दूसरे को मर ने लगे  ये सब देखकर समुन्द्र के ऊपर बलराम जी विराजमान हो गये  भगवान श्री कृष्णा और उन के साथी दारुक ने देखा की बलराम जी के  मुसे एक भयंकर नाग निकल रहा हे और देख ते देख वो  कुछ ही समय में

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 वो सागर में सामगया इस तरा बलराज ने अपना शारीर तियाग दिया krishna जी ने कहा की अब मेरा समय भी आ गया हे इस लिए में लोग में लिक होने जा रहा हु श्री कृष्णा ने कहा की जो बच गए हे वो सब दुवारका  जी को छोड़ कर  भगवन श्री कृष्णा जी के सात चले आए krishna बोले अर्जुन के जाने के बाद दुवारिका समुन्द्र में समां जगी  krishna बोले मेने ये दुवारका के लिये जगा समुन्द्र से ली थी एक शिकारी ने भगवान श्री krishna पर बढ़ चला दिया कोई पक्षी समझ कर और उसी समय श्री krishna ज़मीन पर गिर गए शिकारी ने श्री कृष्णा जी को देखा तो वो घबरा गया तब भगवान श्री krishna ने उस शिकारी को बातया की तुम घबरो मत ये सब तो मेरा ही रचा हुवा था krishna बोले तुम्हारा पूर्व जन्म का हेसान था मुझपर जिसे का वद किया था भगवान श्री राम ने 

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radha krishna-राधा-कृष्ण की अलौकिक की प्रेम कहानी कौन नहीं जनता हे वो दोनों के प्यार में मिलना और दोनों का बिछड़ ना  पौराणिक कथाओं में श्री कृष्णा के रास लीला कर ते बताय गया हे उन्हें एक प्रेमी और कुशल कूटनीतिज्ञ के रूप में प्रदर्शित किया गया है वही राधा को हर समय कृष्णा के प्यार में डूबी हुई प्रेमिका के हुई देखा गया हे radha krishna की प्यार की कहानी बचपन में ही शुरू हो गई थी ये दो नो एक दूसरे को बचपन से ही प्यार कर थे वैसे तो श्री कृष्णा से उम्र में राधा बड़ी हे 

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पर प्यार में कब और किस ने देखी उम्र को देखा हे  राधा और रुक्मिणी,ये दोनों ही कृष्णा जी के लिए महत्वपूर्ण महिला थी इस में से एक ने तो कृष्णा से प्यार क्या तो एक ने विवहा क्या है  राधारानीभगवान जी की प्रेमिका बन कर रहे  गईं।  radha krishnaआप ने हम सभी ने ये बात तो बचपन से सुनी होगी की भगवान श्री कृष्णा और radha   प्रेमी-प्रेमिका थे उन दोनों का वैवाहिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक रिश्ता था क्या सच में ये बात सच है श्री कृष्णा का उनकी प्रेयसी radha  जी के सात विवाह नहीं हुवा था

दोस्तों आज में आप को भगवान श्री कृष्ण और राधा जी के बारे में कुछ बाते बताऊगा  जिन्हें बहुत से लोग नहीं जानते, ये सत्य वाकई आपको हैरान कर देंगे। दोस्तों क्या आप को पता हे की राधा के रूप में  देवी लक्ष्मी ने धरती पर अवतार लिया था और ये बात भी सच हे की भगवान श्री कृष्णा ने भी विष्णु जीके अवतार थे।

 ये बात स्वयं देवी लक्ष्मी ने कही थी कि भगवान विष्णु के अलावा अन्य किसी के साथ उनका विवाह और किसी के सात नहीं होगा गर्ग के अनुसार भगवान radha krishna का विवहा सोयम ब्रह्मा जी ने करवाया था  उन के पिता कृष्णा को अपनी गोद में भंडीर ग्राम ले एक दिन कृष्ण गोद में खेल रहे थे की अचानक तूफान और तेज रोशनी  गया  और कोई नहीं वो स्वयं वो राधा रानी थीं।राधा जी के आते ही श्री कृष्ण जी ने भी अपना बल रूप  त्यागकर कर अपने  किशोर रूप धारण कर लिया उसी समय भगवन श्री ब्रह्मा जी ने राधा जी का और भगवान कृष्णा जी का विवाह करवाया था।

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जब जब इस धरती पर पाप होता है भगवान इंसान का रूप लेकर इस धरती जन्म लेते है भगवान विष्णु ने भी कृष्णा जी के रूप में जन्म लिया था मान्यता है कि द्वापर युग के अंतिम चरण में भगवान कृष्ण जी रात्रि में जन्म लिया था उस दिन लोग krishna janmashtami के नाम से जानते हे  भगवान कृष्ण जी का जन्म मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी व श्रीवसुदेव के पुत्र रूपमें हुआ कंस में अपनी मोत के डर उस ने अपनी सगी बहन और उन के पति को जल में डाल दिया था 

कंस की सगी बहन और उनके पति का नाम देवकी और उन के पति का नाम वसुदेव था  जब भगवान कृष्ण जी का जन्म हुवा था तब चारो तरफ अंधकार छाया हुआ था. 

और तेज मुसला दर वर्षा हो रही थी krishna janmashtami  भगवान कृष्ण जी के अनु सर उन को मथुरा से उन को गोकुल में  नंद बाबा के घर ले जाया गयाKrishna Janmashtami के दिन नन्द और  यशोदा जी के घर  में एक कन्या का जन्म हुवा था Krishna Janmashtami के दिन वासुदेव ने श्री कृष्ण  को यशोदा जी के पास सुला दिया और उन की जो कन्या ने जन्म लिया था उस का अपने सात ले गए कंस को जब पता चला की की देवकी को संतान हुई हे वो  कारागार चला आया उन की संतान को पटक कर मर दिया  पर वो कन्या नहीं मरी और वो बोली दुस्ट मानव तेको मर ने वाला तो इस संसार में आ चूका हे श्रीकृष्ण जी बड़े हुए तो उन्होंने कंस का वध कर अपने माता-पिता को उसकी कैद से मुक्त कराया.

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श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैकन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश या द्वारकाधीश, वासुदेव आदि नामों से भी उनको जाना जाता हैbal krishna बाल कृष्ण के उन के एक प्रिये मित्र था उन का नाम सुदामा हे उन दोनों ने bal krishna में भोत सेतनी की है किसी के घर में घुश कर मखन चुराना किसी के घर में जा कर हांड़ी फोड़ न अपनी माता जी को सतना 

 

 

 

 

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