Shiv chalisa in hindi-शिव चालीसा इन हिंदी

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Shiv chalisa in hindi-शिव चालीसा इन हिंदी

 
धममदेव क कपना क गई है। मायता हैक यही देव व के रचयता, संचालक और पालक ह। देव मको संहारक माना गया है। शवजी को उनके भोलेवभाव केकारण भोलेनाथ भी कहा जाता है। कहा जाता हैक शवजी क आराधना करनेवालेजातक मृयु का भय भी नह सताता।
शिव वजी भगवान शव क आराधना केलए सबसेआसान मं है”ऊं नम: शवाय”। इस मं केसाथ शवजी क पूजा मशव चालीसा का भी उपयोग कया जाता है। शव चालीसा ह धामक पुतक मभी वणत है।
Shiv chalisa in hindi-शिव चालीसा इन हिंदी

 

 (Shri Shiv Chalisa in Hindi)
।।दोहा।।
 ी गणेश गरजा सुवन, मंगल मूल सुजान।कहत अयोयादास तुम, दे अभय वरदान॥ जय गरजा पत दन दयाला। सदा करत सतन तपाला॥भाल चमा सोहत नीके। कानन कु डल नागफनी के॥अंग गौर शर गंग बहाये। मुडमाल तन छार लगाये॥व खाल बाघबर सोहे। छव को देख नाग मुन मोहे॥1॥
मैना मातु क ै लारी। बाम अंग सोहत छव यारी॥कर शूल सोहत छव भारी। करत सदा शुन यकारी॥नद गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मय कमल ह जैसे॥कातक याम और गणराऊ। या छव को कह जात न काऊ॥2॥
देवन जबह जाय पुकारा। तब ही ख भु आप नवारा॥कया उपव तारक भारी। देवन सब मल तुमह जुहारी॥तुरत षडानन आप पठायउ। लवनमेष महँ मार गरायउ॥आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुहार वदत संसारा॥3॥
 पुरासुर सन यु मचाई। सबह कृपा कर लीन बचाई॥कया तपह भागीरथ भारी। पुरब ता तसु पुरारी॥दानन महं तुम सम कोउ नाह। सेवक तुत करत सदाह॥वेद नाम महमा तव गाई। अकथ अनाद भेद नह पाई॥4॥
गट उदध मंथन म वाला। जरे सुरासुर भये वहाला॥कह दया तहँ करी सहाई। नीलकठ तब नाम कहाई॥पूजन रामचं जब कहा। जीत के लंक वभीषण दहा॥सहस कमल म हो रहे धारी। कह परीा तबह पुरारी॥5॥
एक कमल भु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥कठन भ देखी भु शंकर। भये स दए इछत वर॥जय जय जय अनंत अवनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥ सकल नत मोह सतावै । मत रहे मोह चैन न आवै॥6॥
ाह ाह म नाथ पुकारो। यह अवसर मोह आन उबारो॥लै शूल शुन को मारो। संकट से मोह आन उबारो॥मातु पता ाता सब कोई। संकट म पूछत नह कोई॥वामी एक है आस तुहारी। आय हर अब संकट भारी॥7॥
 
 धन नधन को देत सदाह। जो कोई जांचे वो फल पाह॥अतुत केह वध कर तुहारी। म नाथ अब चूक हमारी॥शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण वन वनाशन॥योगी यत मुन यान लगाव। नारद शारद शीश नवाव॥8॥
नमो नमो जय नमो शवाय। सुर ादक पार न पाय॥जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शभु सहाई॥ॠनया जो कोई हो अधकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥पु हीन कर इछा कोई। नय शव साद तेह होई॥9॥
 पडत योदशी को लावे। यान पूवक होम करावे ॥योदशी त करे हमेशा। तन नह ताके रहे कलेशा॥धूप दप नैवे चढ़ावे। शंकर समुख पाठ सुनावे॥जम जम के पाप नसावे। अतवास शवपुर म पावे॥10॥
कहे अयोया आस तुहारी। जान सकल ःख हर हमारी॥ ॥दोहा॥ न नेम कर ातः ही, पाठ कर चालीसा।तुम मेरी मनोकामना, पूण करो जगदश॥मगसर छठ हेमत ॠतु, संवत चौसठ जान। अतुत चालीसा शवह, पूण कन कयाण॥
Shiv chalisa lyrics 
।।दोहा।।
ी गणेश गरजा सुवन, मंगल मूल सुजान।  कहत अयोयादास तुम, दे अभय वरदान॥ 
 
 जय गरजा पत दन दयाला। सदा करत संतन तपाला॥  भाल चंमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥ 
अंग गौर शर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये॥  व खाल बाघंबर सोहे। छव को देख नाग मुन मोहे॥  मैना मातु क ै लारी। बाम अंग सोहत छव यारी॥  कर शूल सोहत छव भारी। करत सदा शुन यकारी॥  नंद गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मय कमल ह जैसे॥  कातक याम और गणराऊ। या छव को कह जात न काऊ॥  देवन जबह जाय पुकारा। तब ही ख भु आप नवारा॥  कया उपव तारक भारी। देवन सब मल तुमह जुहारी॥  तुरत षडानन आप पठायउ। लवनमेष महं मार गरायउ॥  आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुहार वदत संसारा॥  पुरासुर सन यु मचाई। सबह कृपा कर लीन बचाई॥ कया तपह भागीरथ भारी। पुरब ता तसु पुरारी॥  दानन महं तुम सम कोउ नाह। सेवक तुत करत सदाह॥  वेद नाम महमा तव गाई। अकथ अनाद भेद नह पाई॥ गट उदध मंथन म वाला। जरे सुरासुर भये वहाला॥  कह दया तहं करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥  पूजन रामचं जब कहा। जीत के लंक वभीषण दहा॥ 
सहस कमल म हो रहे धारी। कह परीा तबह पुरारी॥ एक कमल भु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥  कठन भ देखी भु शंकर। भये स दए इछत वर॥  जय जय जय अनंत अवनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥  सकल नत मोह सतावै । मत रहे मोह चैन न आवै॥  ाह ाह म नाथ पुकारो। यह अवसर मोह आन उबारो॥  लै शूल शुन को मारो। संकट से मोह आन उबारो॥  मातु पता ाता सब कोई। संकट म पूछत नह कोई॥  वामी एक है आस तुहारी। आय हर अब संकट भारी॥  धन नधन को देत सदाह। जो कोई जांचे वो फल पाह॥  अतुत केह वध कर तुहारी। म नाथ अब चूक हमारी॥  शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण वन वनाशन॥  योगी यत मुन यान लगाव। नारद शारद शीश नवाव॥  नमो नमो जय नमो शवाय। सुर ादक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शंभु सहाई॥ 
ॠनया जो कोई हो अधकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥  पु हीन कर इछा कोई। नय शव साद तेह होई॥  पंडत योदशी को लावे। यान पूवक होम करावे ॥  योदशी त करे हमेशा। तन नह ताके रहे कलेशा॥  धूप दप नैवे चढ़ावे। शंकर समुख पाठ सुनावे॥  जम जम के पाप नसावे। अतवास शवपुर म पावे॥  कहे अयोया आस तुहारी। जान सकल ःख हर हमारी॥  ॥दोहा॥ न नेम कर ातः ही, पाठ कर चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूण करो जगदश॥ मगसर छठ हेमंत ॠतु, संवत चौसठ जान। अतुत चालीसा शवह, पूण कन कयाण॥ 
Shiv chalisa lyrics in hindi
 Shiv Chalisa Lyrics In Hindi, एक मं / आरती हैजो भगवान शिव   क तुत करनेकेलए द जाती है। भगवान शव क पूजा करने का सबसेआसान मं “ओम नमः शवाय” है। इस मं केसाथ शव क पूजा करनेमशव चालीसा का भी उपयोग कया जाता है। शव चालीसा का उलेख ह धामक पुतक मभी है। शवजी को उनके भोलेवभाव केकारण भोलेनाथ भी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है क जो शव क पूजा करता है, वह मृयुसेभी नह डरता।
Shiv Chalisa Lyrics In Hindi
 
, गायका अनुराधा पौडवाल ारा गाया गया है। चालीसा का संगीत शेखर सेन ारा रचत हैऔर इसे ट-Series संगीत लेबल के तहत रलीज़ कया गया है।
 ।दोहा।।
ी गणेश गरजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोयादास तुम, दे अभय वरदान॥
 जय गरजा पत दन दयाला। सदा करत संतन तपाला॥ भाल चंमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये॥ व खाल बाघंबर सोहे। छव को देख नाग मुन मोहे॥ मैना मातु क ै लारी। बाम अंग सोहत छव यारी॥ कर शूल सोहत छव भारी। करत सदा शुन यकारी॥
 नंद गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मय कमल ह जैसे॥ कातक याम और गणराऊ। या छव को कह जात न काऊ॥
देवन जबह जाय पुकारा। तब ही ख भु आप नवारा॥ कया उपव तारक भारी। देवन सब मल तुमह जुहारी॥
 तुरत षडानन आप पठायउ। लवनमेष महं मार गरायउ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुहार वदत संसारा॥ पुरासुर सन यु मचाई। सबह कृपा कर लीन बचाई॥ कया तपह भागीरथ भारी। पुरब ता तसु पुरारी॥
दानन महं तुम सम कोउ नाह। सेवक तुत करत सदाह॥ वेद नाम महमा तव गाई। अकथ अनाद भेद नह पाई॥ गट उदध मंथन म वाला। जरे सुरासुर भये वहाला॥ कह दया तहं करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचं जब कहा। जीत के लंक वभीषण दहा॥ सहस कमल म हो रहे धारी। कह परीा तबह पुरारी॥ एक कमल भु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥ कठन भ देखी भु शंकर। भये स दए इछत वर॥
 जय जय जय अनंत अवनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥ सकल नत मोह सतावै । मत रहे मोह चैन न आ
 
ाह ाह म नाथ पुकारो। यह अवसर मोह आन उबारो॥ लै शूल शुन को मारो। संकट से मोह आन उबारो॥
मातु पता ाता सब कोई। संकट म पूछत नह कोई॥ वामी एक है आस तुहारी। आय हर अब संकट भारी॥ धन नधन को देत सदाह। जो कोई जांचे वो फल पाह॥ अतुत केह वध कर तुहारी। म नाथ अब चूक हमारी॥ शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण वन वनाशन॥
योगी यत मुन यान लगाव। नारद शारद शीश नवाव॥ नमो नमो जय नमो शवाय। सुर ादक पार न पाय॥ जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शंभु सहाई॥
ॠनया जो कोई हो अधकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥ पु हीन कर इछा कोई। नय शव साद तेह होई॥ पंडत योदशी को लावे। यान पूवक होम करावे ॥ योदशी त करे हमेशा। तन नह ताके रहे कलेशा॥
धूप दप नैवे चढ़ावे। शंकर समुख पाठ सुनावे॥ जम जम के पाप नसावे। अतवास शवपुर म पावे॥ कहे अयोया आस तुहारी। जान सकल ःख हर हमारी॥
 ॥दोहा॥
 न नेम कर ातः ही, पाठ कर चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूण करो जगदश॥ मगसर छठ हेमंत ॠतु, संवत चौसठ जान। अतुत चालीसा शवह, पूण कन कयाण॥ 
 
Shiv chalisa
 भगवान्शव अपनेभो पर बत ही जद स हो जातेहै! भोलेनाथ को उनक सौय आकृत केसाथ उह प केलए भी जाना जाता है! वेद केअनुसार भ शव चालीसा का अनुसरण अपने जीवन मआनेवालेकठनाइय और बाधा को र करनेकेलए करतेहै!
शिव  चालीसा केमायम सेआप भी अपनेजीवन मआनेवालेपरेशानी और बाधा को र कर सकतेहै! शव चालीसा का अनुसरण करके शव भगवान्क अपार कृपा ात कर सकतेहै! केजीवन म शव चालीसा का महव है!
 शिव चालीसा केसरल शद सेभगवान्शव को आसानी सेस कया जा सकता है! शिव  चालीसा केकेमदद सेकठन सेकठन काम को आसानी सेकया जा सकता है! शव चालीसा के 40 पंयाँ सरल शद मवमान है! इसक महमा अपार है, भगवान शव, भोले वभाव के होनेकेकारण भोलेनाथ कहलातेहै! और वेशव चाहए के पाठ सेभो पर बत ही आसानी सेस हो जातेहै! और उनक मनोकामना को पूरी करतेहै!
 
शव चालीसा पाठ क सरल वध अनुम [दखाए]
 
सुबह जद उठकर नान करे और साफ सुथरे कपडे पहने, अपना मुहं पूव दशा म रखे और कुशा के आसन पर बैठे! पूजन म सफेद
चदन, चावल , कलावा, धुप – दप, पीले फुल क माला और हो सके तो सफ़ेद आँख के 11 फुल भी रखे! और शु मी को साद के लए रखे!
शिव  चालीसा पाठ करने से पहले गाय के घी का दया जलाए, और एक लोटे म शु जल भरकर रखे! भगवान ् शव चालीसा का तीन या पांच पर पाठ करे ! पाठ आप बोलकर करे, जतने भी लोगो को यह सुनाई देगा, उनको भी लाभ होगा, शव चालीसा का पाठ पूण भ भाव से करे और भगवान शव को स करे! पाठ पूरा हो जाने पर लोटे के जल को सारे घर म छड़क दे! थोडा सा जल आप वयम पी ले, और मी को साद के प म खाए और सबको भी बांटे!
शिव  चालीसा कैसे करेगी मनोकामना पूरी
 अगर आप अपनी मनोकामना को जद से जद पूरी करना चाहते है तो आपको ह मुत म आप एक सफेद आसन पर बैठे , उतर-पूव या पूव दशा को तरफ मुख करके बैठे , गाय के घी का दया जलाकर शव चालीसा का 11 बार पाठ करे! जल का पा रखे और मी का भोग लगाये! एक बेलप भी शवलग पर अपण करे ! मनचाहे वरदान क इछा करे और यह पाठ चालीस दन तक लगातार करे! इससे आपको आपका मनचाही मनोकामना जर पूरी होगी! 
 
शिव  चालीसा | Shiv Chalisa
 
 ।।दोहा।।
 
ी गणेश गरजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोयादास तुम, दे अभय वरदान॥
 
जय गरजा पत दन दयाला। सदा करत सतन तपाला॥ भाल चमा सोहत नीके। कानन कु डल नागफनी के॥ अंग गौर शर गंग बहाये। मुडमाल तन छार लगाये॥ व खाल बाघबर सोहे। छव को देख नाग मुन मोहे॥1॥
 मैना मातु क ै लारी। बाम अंग सोहत छव यारी॥ कर शूल सोहत छव भारी। करत सदा शुन यकारी॥ नद गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मय कमल ह जैसे॥ कातक याम और गणराऊ। या छव को कह जात न काऊ॥2॥
देवन जबह जाय पुकारा। तब ही ख भु आप नवारा॥ कया उपव तारक भारी। देवन सब मल तुमह जुहारी॥ तुरत षडानन आप पठायउ। लवनमेष महँ मार गरायउ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुहार वदत संसारा॥3॥
 पुरासुर सन यु मचाई। सबह कृपा कर लीन बचाई॥ कया तपह भागीरथ भारी। पुरब ता तसु पुरारी॥ दानन महं तुम सम कोउ नाह। सेवक तुत करत सदाह॥ वेद नाम महमा तव गाई। अकथ अनाद भेद नह पाई॥4॥
गट उदध मंथन म वाला। जरे सुरासुर भये वहाला॥ कह दया तहँ करी सहाई। नीलकठ तब नाम कहाई॥ पूजन रामचं जब कहा। जीत के लंक वभीषण दहा॥ सहस कमल म हो रहे धारी। कह परीा तबह पुरारी॥5॥
 
 एक कमल भु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥ कठन भ देखी भु शंकर। भये स दए इछत वर॥ जय जय जय अनंत अवनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥ सकल नत मोह सतावै । मत रहे मोह चैन न आवै॥6॥
ाह ाह म नाथ पुकारो। यह अवसर मोह आन उबारो॥ लै शूल शुन को मारो। संकट से मोह आन उबारो॥ मातु पता ाता सब कोई। संकट म पूछत नह कोई॥ वामी एक है आस तुहारी। आय हर अब संकट भारी॥7॥
 धन नधन को देत सदाह। जो कोई जांचे वो फल पाह॥ अतुत केह वध कर तुहारी। म नाथ अब चूक हमारी॥ शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण वन वनाशन॥ योगी यत मुन यान लगाव। नारद शारद शीश नवाव॥8॥
नमो नमो जय नमो शवाय। सुर ादक पार न पाय॥ जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शभु सहाई॥ ॠनया जो कोई हो अधकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥ पु हीन कर इछा कोई। नय शव साद तेह होई॥9॥
 
पडत योदशी को लावे। यान पूवक होम करावे ॥ योदशी त करे हमेशा। तन नह ताके रहे कलेशा॥ धूप दप नैवे चढ़ावे। शंकर समुख पाठ सुनावे॥ जम जम के पाप नसावे। अतवास शवपुर म पावे॥10॥ कहे अयोया आस तुहारी। जान सकल ःख हर हमारी॥
॥दोहा॥
 न नेम कर ातः ही, पाठ कर चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूण करो जगदश॥ मगसर छठ हेमत ॠतु, संवत चौसठ जान। अतुत चालीसा शवह, पूण कन कया
 
Shiv chalisa
 Shiva Chalisa : ावण मास म पढ़ पव ी शव चालीसा- जय गरजा पत दन दयाल
 
।।दोहा।।
 ी गणेश गरजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोयादास तुम, दे अभय वरदान॥
 
जय गरजा पत दन दयाला। सदा करत सतन तपाला॥ भाल चमा सोहत नीके। कानन कु डल नागफनी के अंग गौर शर गंग बहाये। मुडमाल तन छार लगाये॥ व खाल बाघबर सोहे। छव को देख नाग मुन मोहे॥ मैना मातु क ै लारी। बाम अंग सोहत छव यारी॥ कर शूल सोहत छव भारी। करत सदा शुन यकारी॥ नद गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मय कमल ह जैसे॥
कातक याम और गणराऊ। या छव को कह जात न काऊ॥
 
देवन जबह जाय पुकारा। तब ही ख भु आप नवारा॥
 
कया उपव तारक भारी। देवन सब मल तुमह जुहारी॥
 
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनमेष महँ मार गरायउ॥
 
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुहार वदत संसारा॥
 
पुरासुर सन यु मचाई। सबह कृपा कर लीन बचाई॥
 
कया तपह भागीरथ भारी। पुरब ता तसु पुरारी॥
 
दानन महं तुम सम कोउ नाह। सेवक तुत करत सदाह॥
 
 वेद नाम महमा तव गाई। अकथ अनाद भेद नह पाई॥
 
 गट उदध मंथन म वाला। जरे सुरासुर भये वहाला॥
 
 कह दया तहँ करी सहाई। नीलकठ तब नाम कहाई॥
 
 पूजन रामचं जब कहा। जीत के लंक वभीषण दहा॥
 
 सहस कमल म हो रहे धारी। कह परीा तबह पुरारी॥
 
 एक कमल भु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
 
 कठन भ देखी भु शंकर। भये स दए इछत वर॥
 
जय जय जय अनंत अवनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
 
 सकल नत मोह सतावै । मत रहे मोह चैन न आवै॥
 
 ाह ाह म नाथ पुकारो। यह अवसर मोह आन उबारो॥
 
 लै शूल शुन को मारो। संकट से मोह आन उबारो॥
 
 मातु पता ाता सब कोई। संकट म पूछत नह कोई॥
 
 वामी एक है आस तुहारी। आय हर अब संकट भारी॥
 
 धन नधन को देत सदाह। जो कोई जांचे वो फल पाह॥ 
 
अतुत केह वध कर तुहारी। म नाथ अब चूक हमारी॥
 
 शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण वन वनाशन॥
 
 योगी यत मुन यान लगाव। नारद शारद शीश नवाव॥
 
 नमो नमो जय नमो शवाय। सुर ादक पार न पाय॥ 
 
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शभु सहाई॥
 
 ॠनया जो कोई हो अधकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
 
 पु हीन कर इछा कोई। नय शव साद तेह होई॥ 
 
पडत योदशी को लावे। यान पूवक होम करावे ॥
 
योदशी त करे हमेशा। तन नह ताके रहे कलेशा॥
 धूप दप नैवे चढ़ावे। शंकर समुख पाठ सुनावे॥
 जम जम के पाप नसावे। अतवास शवपुर म पावे॥
 कहे अयोया आस तुहारी। जान सकल ःख हर हमारी॥
 ॥दोहा॥
 न नेम कर ातः ही, पाठ कर चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूण करो जगदश॥ मगसर छठ हेमत ॠतु, संवत चौसठ जान। अतुत चालीसा शवह, पूण कन कयाण॥ 
Shiv chalisa in hindi
।।दोहा।।
 ी गणेश गरजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोयादास तुम, दे अभय वरदान॥
 
 जय गरजा पत दन दयाला। सदा करत सतन तपाला॥
 
 भाल चमा सोहत नीके। कानन कु डल नागफनी के॥
 
 मैना मातु क ै लारी। बाम अंग सोहत छव यारी॥
 
 कर शूल सोहत छव भारी। करत सदा शुन यकारी॥
 
 नद गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मय कमल ह जैसे॥ 
 
कातक याम और गणराऊ। या छव को कह जात न काऊ॥
 
 देवन जबह जाय पुकारा। तब ही ख भु आप नवारा॥
 
 कया उपव तारक भारी। देवन सब मल तुमह जुहारी॥
 
 तुरत षडानन आप पठायउ। लवनमेष महँ मार गरायउ॥
 शिव चालीसा पढ़नेसेपहलेदोहा पढ़ा जाता हैजो इस कार है। ।। दोहा ।। ी गणेश गरजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोयादास तुम, दे अभय वरदान॥
हेगरजा पु भगवान ी गणेश आपक जय हो। आप मंगलकारी ह, वता के दाता ह, अयोयादास क ाथना हैभुक आप ऐसा वरदान दजससेसारेभय समात हो जांए।
 
 ||शिव  चालीसा चौपाई || 
जय गरजा पत दन दयाला। सदा करत सतन तपाला॥ भाल चमा सोहत नीके। कानन कु डल नागफनी के॥
हेगरजा पत हे, दन हीन पर दया बरसानेवालेभगवान शव आपक जय हो, आप सदा संतो के तपालक रहेह। आपकेमतक पर छोटा सा चंमा शोभायमान है, आपनेकान मनागफनी केकुंडल डाल रख ह।
 
 अंग गौर शर गंग बहाये। मुडमाल तन छार लगाये॥ व खाल बाघबर सोहे। छव को देख नाग मुन मोहे॥
आपक जटा सेही गंगा बहती है, आपके गलेममुंडमाल (माना जाता हैभगवान शव के गलेमजो माला हैउसकेसभी शीष देवी सती के ह, देवी सती का 108वांजम राजा द जापत क पुी के प म आ था। जब देवी सती केपता जापत नेभगवान शव का अपमान
कया तो उहनेय के हवन कुंड मकुदकर अपनी जान देद तब भगवान शव क मुंडमाला पूणई। इसके बाद सती नेपावती के प म जम लया व अमर ई) है। बाघ क खाल के व भी आपके तन पर जंच रहेह। आपक छव को देखकर नाग भी आकषत होतेह।
 
 मैना मातुक ैलारी। बाम अंग सोहत छव यारी॥ कर शूल सोहत छव भारी। करत सदा शुन यकारी॥
माता मैनावंती क लारी अथात माता पावती जी आपके बांयेअंग मह, उनक छव भी अलग सेमन को हषत करती है, तापयहैक आपक पनी के प ममाता पावती भी पूजनीय ह। आपके हाथ मशूल आपक छव को और भी आकषक बनाता है। आपनेहमेशा शु का नाश कया है।
 नद गणेश सोहैतहँकैसे। सागर मय कमल हजैसे॥ कातक याम और गणराऊ। या छव को कह जात न काऊ॥ आपकेसानय मनंद व गणेश सागर के बीच खलेकमल केसमान दखाई देतेह। कातकेय व अय गण क उपथत सेआपक छव ऐसी बनती है, जसका वणन कोई नह कर सकता।
ेवन जबह जाय पुकारा। तब ही ख भुआप नवारा॥ कया उपव तारक भारी। देवन सब मल तुमह जुहारी॥ हेभगवन, देवता नेजब भी आपको पुकारा है, तुरंत आपनेउनके ख का नवारण कया। तारक जैसेरास के उपात सेपरेशान देवता नेजब आपक शरण ली, आपक गुहार लगाई।
 तुरत षडानन आप पठायउ। लवनमेष महँमार गरायउ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुहार वदत संसारा॥
हेभूआपनेतुरंत तरकासुर को मारनेकेलए षडानन (भगवान शव व पावती के पु कातकेय) को भेजा। आपनेही जलंधर (ीमदद् ेवी भागवत् पुराण केअनुसार भगवान शव के तेज सेही जलंधर पैदा आ था) नामक असुर का संहार कया। आपकेकयाणकारी यश को पूरा संसार जानता है।
 
पुरासुर सन यु मचाई। सबह कृपा कर लीन बचाई॥ कया तपह भागीरथ भारी। पुरब ता तसुपुरारी॥
हेशव शंकर भोलेनाथ आपनेही पुरासुर (तरकासुर के तीन पु नेा क भ कर उनसेतीन अभे पुर मांगेजस कारण उह पुरासुर कहा गया। शतकेअनुसार भगवान शव नेअभजत न म असंभव रथ पर सवार होकर असंभव बाण चलाकर उनका संहार कया था) केसाथ यु कर उनका संहार कया व सब पर अपनी कृपा क। हेभगवन भागीरथ के तप सेस हो कर उनके पूवज क आमा को शांत दलानेक उनक ता को आपनेपूरा कया।
दानन महंतुम सम कोउ नाह। सेवक तुत करत सदाह॥ वेद नाम महमा तव गाई। अकथ अनाद भेद नह पाई॥ हेभूआपकेसमान दानी और कोई नह है, सेवक आपक सदा से ाथना करतेआए ह। हेभुआपका भेद सफ आप ही जानतेह, यक आप अनाद काल सेवमान ह, आपके बारेमवणन नह कया जा सकता है, आप अकथ ह। आपक महमा का गान करनेमतो वेद भी समथनह ह।
गट उदध मंथन मवाला। जरेसुरासुर भयेवहाला॥ कह दया तहँकरी सहाई। नीलकठ तब नाम कहाई॥
 
हेभुजब ीर सागर केमंथन मवष सेभरा घड़ा नकला तो समत देवता व दैय भय सेकांपनेलगे(पौराणक कथा केअनुसार सागर मंथन सेनकला यह वष इतना खतरनाक था क उसक एक बूंद भी ांड केलए वनाशकारी थी) आपनेही सब पर मेहर बरसातेए इस वष को अपनेकंठ मधारण कया जससेआपका नाम नीलकंठ आ।
 
पूजन रामचं जब कहा। जीत केलंक वभीषण दहा॥ सहस कमल महो रहेधारी। कह परीा तबह पुरारी॥ एक कमल भुराखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहंसोई॥ कठन भ देखी भुशंकर। भयेस दए इछत वर॥
 
 हेनीलकंठ आपक पूजा करके ही भगवान ी रामचं लंका को जीत कर उसेवभीषण को सपनेमकामयाब ए। इतना ही नह जब ी राम मांश क पूजा कर रहेथेऔर सेवा मकमल अपण कर रहेथे, तो आपके ईशारेपर ही देवी नेउनक परीा लेतेए एक कमल को छुपा लया।
अपनी पूजा को पूरा करनेकेलए राजीवनयन भगवान राम ने, कमल क जगह अपनी आंख सेपूजा संप करनेक ठानी, तब आप स ए और उहइछत वर दान कया।
 
जय जय जय अनंत अवनाशी। करत कृपा सब केघटवासी॥ सकल नत मोह सतावै। मत रहेमोह चैन न आवै॥ ाह ाह मनाथ पुकारो। यह अवसर मोह आन उबारो॥ लैशूल शुन को मारो। संकट सेमोह आन उबारो॥
 
हेअनंत एवंन न होनेवालेअवनाशी भगवान भोलेनाथ, सब पर कृपा करनेवाले, सबकेघट मवास करनेवालेशव शंभू, आपक जय हो। हे भुकाम, ोध, मोह, लोभ, अंहकार जैसेतमाम मुझेसतातेरहते ह। इहनमुझेम मडाल दया है, जससेमुझेशांत नह मल पाती। हेवामी, इस वनाशकारी थत सेमुझेउभार लो यही उचत अवसर।
अथात जब मइस समय आपक शरण मं, मुझेअपनी भ मलीन कर मुझेमोहमाया सेमु दलाओ, सांसारक क सेउभार। अपने शुल सेइन तमाम का नाश कर दो। हेभोलेनाथ, आकर मुझेइन क सेमु दलाओ।
 
 मातुपता ाता सब कोई। संकट मपूछत नह कोई॥ वामी एक हैआस तुहारी। आय हर अब संकट भारी॥ धन नधन को देत सदाह। जो कोई जांचेवो फल पाह॥ अतुत केह वध कर तुहारी। म नाथ अब चूक हमारी॥
हेभुवैसेतो जगत के नात ममाता-पता, भाई-बंधु, नाते-रतेदार सब होतेह, लेकन वपदा पड़नेपर कोई भी साथ नह देता। हेवामी, बस आपक ही आस है, आकर मेरेसंकट को हर लो। आपनेसदा नधन को धन दया है, जसनेजैसा फल चाहा, आपक भ सेवैसा फल ात कया है। हम आपक तुत, आपक ाथना कस वध से करअथात हम अानी हैभु, अगर आपक पूजा करनेमकोई चूक ई हो तो हेवामी, हममा कर देना।
 
 शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण वन वनाशन॥ योगी यत मुन यान लगाव। नारद शारद शीश नवाव॥
 
हेशव शंकर आप तो संकट का नाश करनेवालेहो, भ का कयाण व बाधा को र करनेवालेहो योगी यत ऋष मुन सभी आपका यान लगातेह। शारद नारद सभी आपको शीश नवातेह।
नमो नमो जय नमो शवाय। सुर ादक पार न पाय॥ जो यह पाठ करेमन लाई। ता पार होत हैशभुसहाई॥ हेभोलेनाथ आपको नमन है। जसका ा आद देवता भी भेद न जान सके , हेशव आपक जय हो। जो भी इस पाठ को मन लगाकर करेगा,
 
 शिव शभुउनक रा करग, आपक कृपा उन पर बरसेगी। ॠनया जो कोई हो अधकारी। पाठ करेसो पावन हारी॥ पु हीन कर इछा कोई। नय शव साद तेह होई॥ पडत योदशी को लावे। यान पूवक होम करावे॥ योदशी त करेहमेशा। तन नह ताके रहेकलेशा॥
 पव मन सेइस पाठ को करनेसेभगवान शव कजमडूबेको भी समृ बना देतेह। यद कोई संतान हीन हो तो उसक इछा को भी भगवान शव का साद नत प सेमलता है। योदशी (चंमास का तेरहवांदन योदशी कहलाता है, हर चंमास मदो योदशी आती ह, एक कृ ण प मव एक शुल प म) को पंडत बुलाकर हवन करवाने, यान करनेऔर त रखनेसेकसी भी कार का क नह रहता।
 
धूप दप नैवे चढ़ावे। शंकर समुख पाठ सुनावे॥ जम जम के पाप नसावे। अतवास शवपुर मपावे॥ कहेअयोया आस तुहारी। जान सकल ःख हर हमारी॥
जो कोई भी धूप, दप, नैवे चढाकर भगवान शंकर केसामनेइस पाठ को सुनाता है, भगवान भोलेनाथ उसकेजम-जमांतर के पाप का नाश करतेह। अंतकाल मभगवान शव केधाम शवपुर अथात वगक ात होती है, उसेमो मलता है। अयोयादास को भुआपक आस है, आप तो सबकुछ जानतेह, इसलए हमारेसारेख र करो भगवन।
 
 ॥दोहा॥ 
न नेम कर ातः ही, पाठ कर चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूणकरो जगदश॥ मगसर छठ हेमत ॠतु, संवत चौसठ जान। अतुत चालीसा शवह, पूणकन कयाण॥
 
बोलो शिव  शंकर भगवान क जय ||
 

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